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मामूली से गाँव के बस कंडक्टर की बेटी बनी IPS अधिकारी, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से भी पा चुकीं है सम्मान

आज अगर हम किसी बड़े अफसर या अधिकारी को देखते हैं तो हमारे दिमागे मे सबसे पहले यही बात आती है की वह कितनी बड़ी पोस्ट पर है, इसे कितना सम्मान और सुविधाएं मिलती होंगी। आपको बता दें की कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में सफलता पाने के लिए कितनी मेहनत करता है और किस किस दौर से गुजर कर वो आगे बढ़ता है, उसके अस्तित्व तथा उसके भूत और वर्तमान के बीच उसे किन किन समस्याओं का सामना करना पड़ा है ये सिर्फ वही जानता है बाकी सभी तो सिर्फ कथा कहानी ही सुनते और सुनते हैं। आज हम आपके सामने एक ऐसे ही इंसान के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने बचपन और युवावस्था के दौरान वो कर दिखाया जो हर किसी के बस की बात नहीं होती।

असल में आज हम बात कर रहे हे एक ऐसी लड़की की जिसने बचपन में ही यह सपना देख लिया था कि बड़े होकर उसे पुलिस में ही जाना है और देश की सेवा करनी है। अपने जज्बे को इसने कभी कम नहीं होने दिया और आगे चलकर उसने अपना सपना पूरा भी किया, बता दें आज वो लड़की IPS ऑफिसर बन गई है और आपको यह जानकार भी बहुत अच्छा लगेगा की इस लड़की को सर्वेश्रेष्ठ आईपीएस ट्रेनी भी चुना गया है। हम जिस लड़की की बात कर रहे हैं उस लड़की का नाम है शालिनी अग्निहोत्री है। बताते चलें की 29 साल की शालिनी ने IPS की सर्वश्रेष्ठ ट्रेनी का खिताब अपने नाम कर लिया है और ऐसा करके उन्होने ना सिर्फ अपने घर परिवार का बल्कि अपना गाँव का अभी नाम ऊंचा किया है जिसकी वजह से उन्हे प्रधानमंत्री के प्रतिष्ठित बेटन और गृह मंत्री की रिवॉल्वर भी दी गई।

आपको बता दें की IPS अधिकारी शालिनी के पिता रमेश एचआरटीसी बस में एक कंडक्टर के तौर पर काम करते हैं और उनकी मां हाउस वाइफ है। हिमाचल के ऊना के ठठ्ठल गांव की रहने वाली शलिनी का जन्म 14 जनवरी 1989 में हुआ था। उनके बार में बताया जाता है की शलिनी को बचपन से उनके माता पिता ने कभी किसी भी चीज़ के लिए माना नहीं किया खासतौर से उनके सपनों को कभी कुचला नहीं और उन्हे हर वो आजादी दी जो वो चाहती थी और शलिनी ने भी अपने माता पिता के इस सपोर्ट का कभी गलत फायदा नहीं उठाया और बचपन से ही अपने देखे सपने को पूरा करने में लगी रहीं।  शालिनी हमेशा से ही मेहनती छात्र में गिनी जाती थी और स्कूल में उनका प्रदर्शन काफी रहता था। उनकी शिक्षा धर्मशाला के DAV स्कूल से हुई है और आगे की पढ़ाई उन्होने हिमाचल प्रदेश एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से की है झन से उन्होने अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की।

आज IPS अधिकारी बन चुकी शालिनी बताती हैं की जब उन्होने UPSC की तैयारी करने के बारे में सोचा तो इसका जिक्र किसी से नहीं किया था। यहां तक कि परिवार को भी इस बारे में नहीं बताया था क्योंकि वो जानती थी ये देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है और ऐसे बहुत से लोग हैं जो कई वर्षों की कठिन मेहनत के बाद भी इस परीक्षा को पास नही कर पाते हैं। मगर यहाँ पर शलिनी के दृढ़ निश्चय और आत्मविश्वास ने उन्हे बहुत हिम्मत दी और मई 2011 में उन्होने UPSC की परीक्षा दी थी जिसका इंटरव्यू मार्च 2012 में  हुआ और परिणाम भी उसी वर्ष मई में आ गया।

जब UPSC परीक्षा का फ़ाइनल परिणाम आया तो उसमे शलिनी को ऑल इंडिया लेवल पर 285वीं रैंक मिली थी जिसने उन्हे बहुत ही ज्यादा आत्मविश्वास से भर दिया। इसके बाद उनका सफर शुरू  हो गया था जब दिसंबर 2012 में हैदराबाद में उन्होने ट्रेनिंग ज्वॉइन की और उनको मिला 148 का बैच, जिसमें वह टॉपर रही।

आपकी जानकारी के लिए बताते चलें की फिलहाल अभी शालिनी हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस के तौर पर सेवा दे रही हैं। बता दें, उन्हें सबसे पहले शिमला में सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात किया गया था। कुछ इस तरह से शलिनी ने एक कोटे से गाँव से निकालकर अपने सपने को उड़ान देते हुए आज इस मुकाम पर पहुँच गयी हैं की उनका नाम देश में जाना जाने लगा है। शलिनी यह भी बताती है की तमाम तरह के अपराधों में शामिल लोगों को जब सजा मिलती है तो उनका खाकी वर्दी पहनने और लोगों की सेवा करने में उनका इरादा और मजबूत होता है।

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